नई दिल्ली. बांग्लादेश (Bangladesh) की जनता 12 फरवरी को नई सरकार (New government) चुनने के लिए वोट डालने जा रही है. पूर्व पीएम शेख हसीना (Sheikh Hasina) को सत्ता से हटाने के बाद बांग्लादेश नए भविष्य की राह देख रहा है. लेकिन इस ट्रांजिशन में भी बांग्लादेश में हिन्दुओं की और दूसरे अल्पसंख्यकों के लिए बहुत स्पेस दिख रहा है. इसका गवाह बांग्लादेश चुनाव से मिल रहे आंकड़े हैं. 17 करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश में मात्र 80 उम्मीदवार अल्पसंख्यक समुदाय से हैं. जी हां आपने सही पढ़ा है.
जिस बांग्लादेश में पिछले एक साल में हिन्दुओं पर तमाम तरह के जुल्म हुए हैं वहां प्रतिनिधित्व की जंग में हिन्दू समेत दूसरे अल्पसंख्यकों का पिछड़ना बेहद चिंताजनक है. 17 करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश में मात्र 80 अल्पसंख्यक कैंडिडेट, इस पार्टी के सबसे ज्यादा उम्मीदवार.
बांग्लादेश की जातीय संसद में कुल 350 सीटें हैं, लेकिन प्रत्यक्ष चुनाव सिर्फ 300 सीटों के लिए होता है. ये 300 सीटें सामान्य निर्वाचन क्षेत्रों से चुनी जाती हैं. बाकी 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होती हैं, जो मुख्य रूप से चुनी गई पार्टियों के अनुपात में बाद में आवंटित की जाती हैं.
हालांकि इस बार बांग्लादेश में 300 सीटों के लिए के चुनाव हो रहा है. यहां बहुमत का आंकड़ा 151 है. इस चुनाव में धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यक समुदायों के कुल 80 उम्मीदवार मैदान में हैं. इन 80 उम्मीदवारों में से 12 निर्दलीय हैं. अल्पसंख्यक कैंडिडेट में 10 महिलाएं हैं. BNP और जमात-ए-इस्लामी सहित कुल 22 राजनीतिक पार्टियों ने इस चुनाव के लिए अल्पसंख्यक समुदायों के 68 उम्मीदवारों को टिकट दिया है.
बांग्लादेश में हिन्दुओं पर जुल्म
बता दें कि पिछले 6 महीनोंमें बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हिंसा की बाढ़ आई है. यहां हिन्दू समेत दूसरे अल्पसंख्यक लगातार हाशिये पर जा रहे हैं. ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार जून 2025 से जनवरी 2026 तक 116 अल्पसंख्यक मौतें हुईं हैं. इनमें ज्यादातर हिंदू हैं. इन मौतों में 12 मॉब लिंचिंग शामिल हैं.
चुनाव लड़ने के लिए कुल 88 अल्पसंख्यक समुदाय के उम्मीदवारों ने नॉमिनेशन पेपर जमा किए थे. चुनाव आयोग ने 5 उम्मीदवारों के नॉमिनेशन पेपर रिजेक्ट कर दिए और 3 उम्मीदवारों ने अपना नॉमिनेशन वापस ले लिया. इस तरह से अब 80 उम्मीदवार मैदान में हैं.
राजनीतिक पार्टियों में बांग्लादेश कम्युनिस्ट पार्टी ने सबसे ज़्यादा अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे हैं. इस पार्टी 17 अल्पसंख्यकों को टिकट दिया है.
बांग्लादेश के अखबार प्रथम आलो के अनुसार इस बार BNP ने अल्पसंख्यक समुदायों से छह उम्मीदवारों को टिकट दिया है. संसदीय चुनाव में पहली बार जमात-ए-इस्लामी ने अल्पसंख्यक समुदाय से एक उम्मीदवार को नॉमिनेट किया है. कृष्णा नंदी खुलना-1 से चुनाव लड़ रहे हैं, जिसमें डाकोप और बाटियाघाटा के हिंदू-बहुल उपज़िले शामिल हैं. वह खुलना के डुमुरिया उपज़िले के चुकनगर के रहने वाले हैं और डुमुरिया उपज़िला जमात की हिंदू कमेटी के अध्यक्ष हैं.
बांग्लादेश में कथित क्रांति करने वाली पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी ने एक अल्पसंख्यक उम्मीदवार को टिकट दिया है.
बांग्लादेश में कुल 1981 उम्मीदवार
बांग्लादेश के इस चुनाव में 298 सीटों के लिए कुल 1981 उम्मीदवार मैदान में हैं.
चुनाव आयोग के डेटा के अनुसार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने इस चुनाव में सबसे ज़्यादा सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जो 288 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. जमात-ए-इस्लामी 224 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश के उम्मीदवार 253 सीटों पर हैं. जातीय पार्टी 192 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, और नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के उम्मीदवार 32 सीटों पर हैं.
बांग्लादेश ब्यूरो ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स द्वारा पब्लिश 2022 की जनसंख्या और आवास जनगणना के अनुसार अल्पसंख्यक कुल आबादी का लगभग 8.96 प्रतिशत हैं. फिर भी चुनावी मैदान में उनकी मौजूदगी इस डेमोग्राफिक हिस्सेदारी को नहीं दिखाती है. लेकिन ताजा आंकड़े बताते हैं कि इस चुनाव में अल्पसंख्यकों की भागीदारी मात्र 4 प्रतिशत है.
