Friday, February 20, 2026
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सोने-चांदी में फिर हलचल, सर्राफा बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव जारी


Sone Chandi ka Aaj ka Rate: सोने-चांदी की कीमतों में तेजी जारी की गई है। चांदी 1560 रुपये की बढ़त के साथ 2.44 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई। सोने का भाव बढ़कर 1.55 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।

वैश्विक संकेतों और जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच सोने-चांदी की कीमतों में इन दिनों भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिससे निवेशकों के साथ-साथ शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने वाले लोग भी दुविधा में हैं। हाजिर बाजार में दोनों की कीमतों में हालिया दिनों में करीब 7% तक की बढ़त दर्ज की गई है।

एमसीक्स पर सोने-चांदी का भाव

राजधानी के सर्राफा बाजार में सोना 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि चांदी 2.6 लाख रुपये प्रति किलो के भाव पर कारोबार कर रही है। दूसरी ओर, कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में सोना लगभग 1,54,700 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,41,400 रुपये प्रति किलो के आसपास बनी हुई है।विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की तुलना में चांदी में कहीं अधिक तेज उतार-चढ़ाव दर्ज किया जा रहा है। MCX पर चांदी की कीमतें एक समय ऐतिहासिक उछाल के साथ 4,20,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थीं, लेकिन उसके बाद इसमें भारी गिरावट आई और फिलहाल यह 2.41 लाख रुपये के करीब ट्रेड कर रही है। इंडस्ट्री की मांग, ग्लोबल मार्केट में बदलाव और निवेशक सेंटीमेंट को इस अस्थिरता का प्रमुख कारण माना जा रहा है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि दीर्घकालिक निवेशक इस गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देख सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना-चांदी की कीमतों में दिखी मजबूती

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने-चांदी में मजबूती देखी गई। कॉमेक्स ट्रेड में सोना शुरुआती गिरावट के बाद 4,996 डॉलर प्रति औंस से संभलकर 5,018.20 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, जो 24 घंटों में करीब 0.43% की बढ़त दर्शाता है। वहीं, स्पॉट सिल्वर 0.67% की तेजी के साथ 78.15 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।मार्केट एनालिस्ट्स के मुताबिक, अमेरिका-ईरान वार्ता में ठोस प्रगति न होने से सेफ-हेवन खरीदारी बढ़ी है, जिससे कीमती धातुओं को समर्थन मिला। इसके अलावा, 19 फरवरी को प्रकाशित ऑगमोंट बुलियन की रिपोर्ट में कहा गया कि लूनर न्यू ईयर अवकाश के दौरान एशियाई बाजारों में कम लिक्विडिटी के कारण गोल्ड मार्केट कंसोलिडेशन फेज में रहा और कीमतों की चाल पर टेक्निकल फैक्टर्स का असर ज्यादा देखने को मिला।

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