Sunday, January 25, 2026
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BJP अध्यक्ष बनते ही नितिन नवीन एक्शन में… विनोद तावड़े को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी


नई दिल्ली। बीजेपी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष (National President) का पद संभालते ही नितिन नवीन (Nitin Naveen) ने पहले ही दिन ताबड़तोड़ फैसले लिए हैं। उन्होंने वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े (Vinod Tawde) को केरल विधानसभा चुनाव (Kerala Assembly Elections) के लिए चुनाव प्रभारी और चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। उनके साथ ही शोभा करंदलाजे को सह प्रभारी बनाया गया है। बता दें कि मंगलवार को ही उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का औपचारिक ऐलान किया गया है। हालांकि कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद ही तय हो गया था कि नितिन नवीन बीजेपी का कमान पूरी तरह से संभालने जा रहे हैं।

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि तेलंगाना नगर और स्थानीय निकाय के चुनाव के लिए आशीष शेलार को चुनाव प्रभारी और अशोक परनामी व रेखा शर्मा को सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा वरिष्ठ नेता राम माधव को ग्रेटर बेंगलुरु निकाय चुनाव का प्रभारी नियुक्त किया गया है। उनके साथ सतीश पुनिया और संजय उपाध्याय को सह प्रभारी का दातित्व सौंपा गया है।

युवाओं का अह्वान
भाजपा मुख्यालय में पार्टी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में अपने नाम की घोषणा के बाद नवीन ने एक कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा की सफलता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करने, “सनातन परंपराओं और आस्था” की रक्षा करने और देश को जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से बचाने का भी आह्वान किया।

उन्होंने कहा, “15 अगस्त, 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के युवाओं से सार्वजनिक जीवन में प्रवेश करने का आह्वान किया था। मैं देश के युवाओं से कहना चाहता हूं कि राजनीति से दूर रहना समाधान नहीं, बल्कि सक्रिय योगदान देना ही समाधान है।” नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के भारत को विकसित देश बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिए युवाओं को आगे आकर “सकारात्मक राजनीति” में भाग लेने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं युवाओं को यह भी बताना चाहूंगा कि राजनीति में कोई शॉर्टकट नहीं है। राजनीति सौ मीटर की दौड़ नहीं, बल्कि मैराथन है, जहां गति नहीं बल्कि सहनशक्ति की परीक्षा होती है। आगे आइए और अपनी जड़ों को मजबूत रखते हुए इस राजनीतिक मैदान पर काम कीजिए।”

 

 

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